आस्था का महाकुंभ सिंहस्थ का समापन
सिंहस्थ समाप्त हो गया है। करीब एक महीने तक चले सिंहस्थ महाकुंभ के दौरान आस्था और आधाय्तम का अनोखा संगम देखने को मिला। सेल्फी लेते श्रद्दालु और अपनी अदाओं से मोहक बनाते साधु लोगों के लिए खास कुतुहल का केंद्र बने। सिंहस्थ महाकुंभ को इस बार सरकार ने भी एक चुनौती के साथ साथ अवसर के रूप में भी देखा। एक अवसर जिसके तहत मध्यप्रदेश को दुनिया के पटल पर अपनी पहचान बनाने का अवसर मध्यप्रदेश को भारत के एक ऐसे राज्य के तौर पर दिखाने का अवसर जहां विकास की अपार संभावनाएं हैं जहां पर्यटन की संभावनाएं हैं जहां उद्योग की संभावनाएं है। जाहिर है अगर दुनिया भर के श्रद्दालुओं को यहां आकर्षित किया तो उनके लिए सुविधाएं भी वैसी ही चाहिए लिहाजा सरकार ने अत्यधिक पैसा खर्च कर उज्जैन में विकास कार्य कराए। सिंहस्थ के पहले और बाद के उज्जैन की तस्वीर काफी बदल गई है। कभी राजा विक्रमादित्य की राजधानी रही उज्जैनी में अब विकास की नई बयार देखी जा सकती है। हजारों होटलें अनेकों फ्लायओवर और सूखी क्षिप्रा में कल कल बहता मां नर्मदा का जल। सरकार ने वह सब कुछ किया जो एक धार्मिक पर्यटन के लिए आवश्यक था। करीब एक माह तक चले इस सामा...