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Showing posts from 2015

आत्मपीड़ा ... पत्रकारिता के सर्वोच्च धर्म "परपीड़ा" को महसूस करने की आदत से भी कहीं ज्यादा

प्रति ,             श्रम मंत्री महोदय , श्रम एवं रोजगार मंत्रालय , भारत सरकार श्रम शक्ति भवन ,             रफी मार्ग , नई दिल्ली विषय - प्रसार भारती के अंतर्गत दूरदर्शन टीवी चैनल में अवैध नियमित कर्मचारियों की भर्ती                     एवं कॉन्ट्रक्चुअल मैनपावर इंगेजी के शोषण  किये जाने के विरूद्ध आवेदन । महोदय जी ,             उपरोक्त विषयांतर्गत निवेदन है कि प्रसार भारती भारत का सबसे बड़ा लोकसेवा प्रसारक स्वायत्त संसथान है जो कि भारत की संसद के प्रति उत्तरदायी है। पूरे भारत वर्ष में इससे बड़ी नेटवर्क पहुँच किसी अन्य टीवी और रेडियो चैनल की नहीं है।  किंतु इसके नीति निर्धारक अधिकारी इसका सत्यानाश करने पर आमादा हैं। इसका बिंदुवार विवरण निम्नवत है। 1.       दूरदर्शन से देशवासियों क...

बस तड़का चाहिए... न्यूज नहीं

 फेसबुक ट्विटर लिंकडेन यूट्यूब स्काइप इंस्ट्राग्राम आदि आदि लगता है कुछ ऐसा जैसे टेढा है पर मेरा है.. खाए जाओ खाए जाओ ... और कुरकुरे हैं तो बस एक के बाद दूसरा खाए जाओ मतलब यह है कि अब खा क्या रहे हैं उसमे कैलोरी कितनी वसा कितना है और अन्य पोषणहार कितना है इससे मतलब नहीं हां बस यह है कि वो चटपटा है तीखा है पहला स्वाद अच्छा है सो लपलपाती जीभ वही स्वाद चाहती है.. बस कुछ यूं ही है सोशल मीडिया यूट्यूब पर एक घंटे पहले अपलोड हुआ वीडियो दस हजार बार देखा जाता है तो व्हाट्सएप पर एक समाचार का संदेश मिनटों में अमेरिका से भोपाल और भोपाल से डिंडौरी के किसी गांव में चला जाता है ...सहजता, सुंदरता और अच्छी पैकेंजिग कंटेट में भले ही दम ना हो लेकिन बस दर्शक एक बार दर्शन कर ले यही सोशल मीडिया का प्रमुख उद्देश्य है। अगर आपने खोला अच्छा लगा तो पूरा पढ़ो नहीं तो आगे बढ़ जाओ . कहां वो सुबह सुबह पेपर का इंतजार और कहां अब घटना के चंद सेकंडों में खबरों का लाखों मील का सफर ..  सूचना क्रांति ने खबरों की रफ्तार में तेजी लाई तो खबरों की धार में भी तेजी आ गई है। अब हेडिंग यह नहीं होगी कि अमेरिका पर साल 2...

सवाल टाइमिंग का है बॉस

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क्रिकेट में बल्लेबाज की टाइमिंग का बहुत महत्व होता है सचिन तेंदुलकर राहुल द्रविण या वीवीएस लक्ष्मण इसलिए सफल हुए क्योंकि गेंदबाजों की गेंदों का सामना करते हुए अपने बल्ले की टाइमिंग का खास खयाल रखते थे कब स्पिनर्स को मारना है तो कब तेज गेंदबाजों की गेंदों को सावधानी से खेलना है तो किसी बाउंसर होती गेंद को फाइन लेग पर उठाकर मारना है .. यह उनकी बेहतर टाइमिंग और कलात्मक बल्लेबाजी ही थी जो आज भी वे बेहतरीन बल्लेबाजी के लिए नजीर माने जाते हैं . फिल्मों में भी डॉयलॉग की टाइमिंग का अपना खास महत्व और मतलब माना जाता है। अभिताम बच्चन को बेहतरीन अभिनेता इसीलिए माना जाता है क्योंकि वे अपनी अभिव्यक्ति में काफी सक्षम थे उनके डॉयलॉग मौजू रहते हैं वे समय और परिस्थिति के मुताबिक डॉयलॉग बोलते हैं। वहीं फिल्म अभिनेता राजकुमार अपने डॉयलॉग और उनकी अंदाज के कारण ही चर्चित हैं। बात टाइमिंग की हो तो चाहे वह खेल हो या फिल्म हो या फिर राजनीति सभी जगह टाइमिंग का खेल है। सूचना संसाधनों के बेहतरीन उपयोग में माहिर केंद्र की मोदी सरकार और राज्य की शिवराज सरकार भी अपनी राजनीति को चमकाने में टाइमिंग का बेहतरीन उपयोग ...

सावधान .. कोई आपको बोलने से रोक रहा है

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इस समय देश में सूचनाओं की आजादी का प्रश्न तेजी से फैला हुआ है। खासकर सूचना तकनीक के एक अहम स्रोत इंटरनेट की आजादी का। भारत में यह सवाल विकसित देशों की अन्य बातों की तरह ही प्रसारित हुआ है। एक विश्व की संकल्पना के जो दुष्प्रभाव हो सकते हैं वे बड़ी तेजी से प्रसारित होते हैं चाहे वह हथियारों का प्रसार हो या फिर सूचनाओं पर पाबंदी लगाने का। निजी कंपनियां चाहती हैं कि वे अब अपने उपभोक्ताओं को इंटरनेट प्रोवाइडर के रूप में काम ना करते हुए विनियामक की भूमिका में काम करें। मतलब यही कि उनकी इंटरनेट सेवाओं का किस रूप में और किन साइटों को देखने में उपयोग किया जा रहा है यह काम वे तय करें। जाहिर है इसका विरोध हो रहा है और ज्यों ज्यों लोग इस विषय पर जानकारी हासिल कर रहे हैं उनका विरोध संख्यात्मक रूप में और अभिव्यक्ति के रूप में अपने पांव पसार रहा है। नेट न्यूट्रिलिटी की मांग कर रहे भारतीयों ने इस संंबंध में ट्राई यानी टेलीकाम रेगुलेटरी अथारिटी ऑफ इंडिया को बाकायदा अपना विरोध दर्ज कराने के लिए ईमेल भी भेजे हैं। भारत सरकार का सूचना एवं प्रोद्योगिकी मंंत्रालय नेट न्यूट्रिलिटी के संबंध में मई के दूसरे सप...

अनूप भाई ऐसी भी क्या नाराजगी

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30 मार्च 2015 रात के करीब दस बज रहे थे ...मैं यूं ही बैठा हुआ नेट पर कुछ खंगाल रहा था कि  अनायास हमारे छोटे भाई सदृश और वरिष्ठ पत्रकार डॉ प्रवीण तिवारी का फोन आया। प्रवीण का फोन आता है तो हम लंबे समय तक देशदुनिया की बात करते हैं और एक दूसरे पर जमकर चिल्लाते हैं लेकिन आज उसकी उदासी और सांसों में बैचेनी को सहज ही समझा जा सकता था। फोन उठाते ही कहा कि एक बुरी खबर है.. मैं चौंक गया मन उधेड़बुन में लग गया .. कयासों के बादल दिमाग में मंडराने लगे सोचा शायद इसने लाइव इंडिया को बॉय बॉय बोल दिया या फिर शायद कुछ और.. इतना समय भी नहीं था, क्योंकि प्रवीण सरीखा हंसमुख व्यक्ति कभी उदास अच्छा नहीं लगता मैने पूछा तो बताया कि भाई अनूप झा नहीं रहे। बताया कि करनाल में सड़क दुर्घटना में अनूप को गहरी चोट आई थी दिल्ली के एम्स अस्पताल में भर्ती कराया दिनभर इलाज चला लेकिन अत्यधिक रक्तस्राव से अनूप की जान नहीं बचाई जा सकी। हम दोनों के लिए अनूप झा का इस तरह से चले जाना किसी व्यक्तिगत क्षति से कम नहीं है। यह उन दिनों की बात है जबकि हम लाइव इंडिया के अखबार प्रजातंत्रलाइव के लिए बहुत शुरुआती दौर में तैया...

CHROMA: इस रात की सुबह नहीं....

CHROMA: इस रात की सुबह नहीं.... : इस रात की सुबह नहीं.. बहुत जाना पहचाना स्लग हो सकता है.. टीवी न्यूज चैनलों पर किसी सितारे की अंतिम यात्रा के लिए या किसी खबर के क्रोमा में...

इस रात की सुबह नहीं....

इस रात की सुबह नहीं.. बहुत जाना पहचाना स्लग हो सकता है.. टीवी न्यूज चैनलों पर किसी सितारे की अंतिम यात्रा के लिए या किसी खबर के क्रोमा में इस वचन को आपने बहुत बार देखा होगा लेकिन यह भी सच है कि वाकई इस रात की सुबह नहीं है युवाओं की हमारे तरुणाई की . वो तरुणाई जिसे देश के लिए कुछ करना चाहिए वह कुछ नहीं कर पा रही है वह इस समय एक कन्फ्यूजन में डूबी है कि क्या करे 30 से 40 वर्ष का युवा खुद को समझ नहीं पा रहा है कि वो आज क्या करे जिससे कि उसे अपना शानदार कैरियर मिल जाए और वह शांति पूर्वक अपना जीवन यापन कर सके। प्यार रिश्ते नाते सभी कुछ केवल इस बात पर निर्भऱ करते हैं वह स्वयं कितना आत्मनिर्भर है। इस बात को जो युवा जितनी जल्दी और जितनी शीघ्रता से ग्रेस्प कर लेता है वही जीवन में खुद को सफल पाता है। खैर