इस रात की सुबह नहीं....
इस रात की सुबह नहीं.. बहुत
जाना पहचाना स्लग हो सकता है.. टीवी न्यूज चैनलों पर किसी सितारे की अंतिम यात्रा
के लिए या किसी खबर के क्रोमा में इस वचन को आपने बहुत बार देखा होगा लेकिन यह भी
सच है कि वाकई इस रात की सुबह नहीं है युवाओं की हमारे तरुणाई की . वो तरुणाई जिसे
देश के लिए कुछ करना चाहिए वह कुछ नहीं कर पा रही है वह इस समय एक कन्फ्यूजन में
डूबी है कि क्या करे 30 से 40 वर्ष का युवा खुद को समझ नहीं पा रहा है कि वो आज
क्या करे जिससे कि उसे अपना शानदार कैरियर मिल जाए और वह शांति पूर्वक अपना जीवन
यापन कर सके। प्यार रिश्ते नाते सभी कुछ केवल इस बात पर निर्भऱ करते हैं वह स्वयं
कितना आत्मनिर्भर है। इस बात को जो युवा जितनी जल्दी और जितनी शीघ्रता से ग्रेस्प
कर लेता है वही जीवन में खुद को सफल पाता है। खैर
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