आत्मपीड़ा ... पत्रकारिता के सर्वोच्च धर्म "परपीड़ा" को महसूस करने की आदत से भी कहीं ज्यादा

प्रति ,
            श्रम मंत्री महोदय,
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय,
भारत सरकार श्रम शक्ति भवन,
            रफी मार्ग, नई दिल्ली

विषय - प्रसार भारती के अंतर्गत दूरदर्शन टीवी चैनल में अवैध नियमित कर्मचारियों की भर्ती    
                एवं कॉन्ट्रक्चुअल मैनपावर इंगेजी के शोषण  किये जाने के विरूद्ध आवेदन ।

महोदय जी,
            उपरोक्त विषयांतर्गत निवेदन है कि प्रसार भारती भारत का सबसे बड़ा लोकसेवा प्रसारक स्वायत्त संसथान है जो कि भारत की संसद के प्रति उत्तरदायी है। पूरे भारत वर्ष में इससे बड़ी नेटवर्क पहुँच किसी अन्य टीवी और रेडियो चैनल की नहीं है।  किंतु इसके नीति निर्धारक अधिकारी इसका सत्यानाश करने पर आमादा हैं। इसका बिंदुवार विवरण निम्नवत है।
1.      दूरदर्शन से देशवासियों के लिए समाचार एवं कार्यक्रम प्रसारित किए जाते हैं जो सूचित, शिक्षित एवं लोगों को मनोरंजन को ध्यान मे रखकर निर्मित किए जाते है।


2.      वर्ष 2013 में स्नातक स्तर पर एसएससी के माध्यम से दूरदर्शन में कुल 800 नियमित कर्मचारियो ट्राँसमीशन एक्ज़ीक्युटिव एवं प्रोग्राम एक्ज़ीक्युटिव की भर्ती हुई है। गौरतलब है कि यह कर्मचारी जनसंचार एवं पत्रकारिता में से किसी भी तरह की कोई शैक्षणिक योग्यता नहीं रखते हैं। अतः यह दूरदर्षन में काम करने के लिए योग्यता नहीं रखते यह पूर्णतः अवैध हैं।






3.      हमारे देश में पिछले लंबे समय से जनसंचार एवं पत्रकारिता तथा कार्यक्रम निर्माण से संबंधित कई राष्ट्रीय - अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रसिद्ध विश्वविद्यालय एवं संस्थान हैं।
जैसे- 1. भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली
         2. माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल
       3. कुषाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर
       4. भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान, पुणे
       5. राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नई दिल्ली

इनके अतिरिक्त अधिकांश विश्वविद्यालयों में पत्रकारिता एवं जनसंचार संबंधित कई प्रकार के कोर्स संचालित किए जाते हैं यह विश्वविद्यालय प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से राज्य एवं केंद्र सरकार से संबंधित हैं। इन विश्वविद्यालयों में  पत्रकारिता एवं जनसंचार से संबंधित विभिन्न विधाओं में गहन सैद्धांतिक, तकनीकी एवं व्यवाहरिक शिक्षण -प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रत्येक वर्ष इन विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों से हजारों की संख्या में विद्यार्थी डिग्री लेकर बाहर निकलते हैं। किंतु वे अपने आपको ठगासा महसूस करते हैं क्योंकि भारत के सबसे बड़े लोकसेवा प्रसारक प्रसार भारती की नियुक्ति में पत्रकारिता एवं जनसंचार की डिग्री की कोई आवष्यकता नहीें है। एक ओर जहाँ सरकार रोजगार मूलक शिक्षा को प्रोत्साहित करने की बात करती हैं, वहीं सरकार के आधीन व स्वायत्त संस्थानो की नजरों में इस प्रकार के पाठ्यक्रमों का कोई महत्व ही नहीं नजर आता।
4.      इस प्रकार पत्रकारिता एवं जनसंचार से जुड़े शिक्षण एवं प्रशिक्षण विशवविद्यालय एवं संस्थान भारत में औचित्यहीन हैं। प्रतिवर्ष हजारों की संख्या में इन विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों का धन, श्रम एवं समय बर्बाद हो रहा है और युवा ऊर्जा को हत्तोसाहित किया जा रहा है।

5.      वर्ष 2013 में दूरदर्शन में भर्ती के लिए आयोजित एसएससी की परीक्षा में जनसंचार एवं मीडिया से संबंधित प्रश्नों को न पूछकर लिपिकीय प्रश्नों को पूछा गया। रेलवे एवं बैंक की परीक्षा की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों का इसमें चयन हुआ है। यह उम्मीदवार मीडिया, जनसंचार एवं पत्रकारिता की समझ रखते ही नहीं हैं।
6.      इन नियमित कर्मचारियों की नियुक्ति हुए एक महीने से अधिक लंबा समय हो गया है किंतु इनको अभी तक कोई जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई है। इन्हें केवल ट्रेनिंग दी जा रही है। जिसमें सरकारी पैसों का अपव्यय किया जा रहा है।

7.      गौरतलब है कि प्रसार भारती के अंतर्गत कैजुअल एवं कॉन्ट्रक्चुअल मैनपावर इंगेजी को रखा जाता हैं । इसमें शैक्षिणक योग्यता पत्रकारिता एवं जनसंचार संबंधी डिग्री डिप्लोमा को अनिवार्य किया जाता है। और इनका चयन राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित लिखित परीक्षा एवं साक्षात्कार के माध्यम से होता है यही लोग मुख्य रूप से समाचार एवं कार्यक्रम निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है किंतु महती विडंबना यह है कि इन्हें कॉन्ट्रक्ट के आधार पर रखा जाता है। समय-समय पर इन्हे येन-केन प्रताड़ित किया जाता है।


8.      कॉन्ट्रक्चुअल एवं कैजुअल लोेगों को बहुत कम एक मुश्त पारिश्रमिक तीन से चार माह के विलंब से दिया जाता है। किसी प्रकार के अन्य भत्ते और स्वास्थ्य सुविधा नहीं दी जाती हैं।  कॉन्ट्रक्चुअल कर्मचारियों के प्रति प्रबंधन का रवैया सामंतवादी है। इनके रिनुअल में हमेशा विलंब किया जाता है जिसके परिणाम स्वरूप वेतन में विलंब होता है। गौर करिए क्या इनका घर परिवार नहीं है। दैनिक खर्चे ये लोग कैसे वहन करें। क्या यह भारत के नागरिक नहीं हैं, क्या इन्हें रोजगार का अधिकार नहीं है।प्रसार भारती के कॉन्ट्रक्चुअल नियम शर्तों के कारण इनको बैंक से लोन मिलना भी लगभग नामुकिन है। गौरतलब है कि जहाँ एक ओर हाल ही में भर्ती नियमित कर्मचारी को इस क्षेत्र का ज्ञान नहीं है उन्हे दूरदर्षन में काम सिखाया जा रहा है और मुफ्त में मोटी तनख्वाह समय से प्रदान की जा रही है साथ हीे टीए, डीए, बोनस बच्चों की फीस इत्यादि दिया जाता है ये इनके वास्तविक हकदार नहीं बल्कि कॉन्ट्रक्चुअल एवं कैजुअल कर्मचारी इसके वास्तविक हकदार हैं। और मूल रूप से काम करने वाले कॉन्ट्रक्चुअल एवं कैजुअल कर्मचारी यहाँ काम कर रहे हैं उन्हे प्रताड़ित किया जा रहा है। योग्यता के बावजूद कॉन्ट्रक्चुअल एवं कैजुअल कर्मचारियों के साथ भेदभाव और सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। हाल ही में प्रसार भारती ने एक वर्ष में मिलने वाले 30 दिनों के अवकाष को घटाकर 16 कर अमानवीय कृत किया है वहीं नियमित कर्मचारियों के अवकाशों में किसी तरह की कोई कटौती नहीं की गई है। नियमित कर्मचारियों को 57 दिनों की अवकशों की पात्रता दे रखी। प्रसार भारती का यह कदम समानता के अधिकार का उल्लघंन है।

9.      दूरदर्शन केंद्र के उच्च अधिकारियों द्वारा कॉन्ट्रक्चुअल कर्मचारियों को मौखिक रूप से आदेश दिया जा रहा है कि हाल ही में नियुक्त इन नियमित कर्मचारियों को काम सिखाया जाए। गौर करिए यह नियमित कर्मचारी जब तक यहाँ कार्यक्रम एवं समाचार संबंधी काम सीखेंगे तब तक नए ट्रेंड और आमूल चूल परिवर्तन हो चुकेंगे। ऐसे में दूरदर्शन क्या लोंगो के बीच अपनी लोकप्रियता बना सकेगा।


10.  हम सरकार से पूछना चाहते हैं कि क्या बीएचईएल, एनटीपीसी, ओएनजीसी, एनएचपीसीजैसे संस्थानों में आईआईटी, बीई, आईटीआई की योग्यता रखने वाले उम्मीदवारों की जगह क्या प्रोडेक्शन हेतु सामान्य स्नातक (बीए. बीकॉम, बीएससी, बीबीए) व्यक्तियों को एसएससी जैसी परीक्षा के माध्यम से लिपिकीय प्रश्नों को पूछकर भर्ती किया जा सकता हैं। यदि नही ंतो दूरदर्शन में क्यों। दूरदर्शन में भी कार्यक्रम एवं समाचार निर्माण में विशेष शैक्षणिक योग्यता से संबंधित व्यक्तियों को नियुक्तिय किया जाना चाहिए जो कार्यक्रम एवं समाचार निर्माण संबंधी शैक्षणिक योग्यता रखते हों।

11.  अतः शीघ्र अति शीघ्र इन व्यक्तियों की भर्ती निरस्त की जाए या इन्हें लिपिकीय संबंधी कार्य में लगाया जाए न कि कार्यक्रम एवं समाचार निर्माण में क्योंकि यह लोग इस क्षेत्र की मूलभूत न्यूनतम योग्यता एवं ज्ञान नहीं रखते हैं। कॉन्ट्रक्चुअल कर्मचारी कार्यक्रम एवं समाचार निर्माण के क्षेत्र में उच्च शैक्षणिक योग्यता एवं अनुभव रखने वाले व्यक्तियों को नियमित किया जाए है।

12.  इसी के साथ उन अधिकारियों पर उचित कार्रवाई की जाए जिन्होंने इस तरह के मापदंड बानए हैं। इस नीति के कारण प्रसार भारती प्रतिस्पर्धा के युग में निजी टीवी चैनलों से  पिछड़ रहा है।  इस नीति के कारण योग्य व्यक्ति हत्तोसाहित हो रहे हैं उनके संस्थान में दूसरे दर्जे का समझा जाता है।

13.  पत्रकारिता एवं जनसंचार से संबंधित विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों से यह अपील की जाती है कि इन मुद्दों पर गहनता से विचार कर प्रसार भारती में हुई इन नियमित कर्मचारियों की अवैध नियुक्ति के विरूद्ध अवाज उठाएं अथवा इस तरह के पाठ्यक्रम का संचालन बंद करे जिससे युवा इस प्रकार के पाठ्यक्रम में प्रवेश कर अपना भविष्य और बहुमुल्य जीवन खराब न करें।


14.  भारत को सबसे युवा देश कहा जाता है किंतु नीति निर्धारकों के कारण ऐसी नीतियों का निर्माण किया जा रहा है जिसके कारण युवा हत्तोतसाहित है। प्रसार भारती से रिटायर्ड नियमित कर्मचारियों को ऊँचे मासिक वेतन पर पुनः कॉन्ट्रक्चुअल के रूप मे काम पर रख लिया जाता है। उसे दो प्रकार से लाभ दिया जाता है। पहला पेंशन के रूप में धनराशि दूसरा वेतन पाकर इस प्रकार युवा बेरोजगार होकर सड़क पर घूम रहे हैं और वृद्घ दोहरा लाभ कमा रहे हैं।
15.       हे देश के नीति निर्धारकों जागो युवा ऊर्जा का अपव्यय नहीं करो।
                                                                                                                     प्रार्थी
समस्त कॉन्ट्रक्चुअल एवं कैजुअल
कर्मचारी
            प्रतिलिपि -
1.         मुख्य न्यायाधीश, उच्चतम न्यायालय के स्वतः संज्ञान हेतु
2.         प्रधानमंत्री, भारत सरकार
3.         सूचना एवं प्रसारण मंत्री, भारत सरकार
4.         उपाध्यक्ष, नीति आयोग, भारत सरकार
5.         अध्यक्ष, भारतीय प्रेस परिषद
6.         अध्यक्ष, भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली
7.         कुलपति, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल
8.         कुलपति, कुषाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर
9.         अध्यक्ष,भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान, पुणे
10.       अध्यक्ष, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नई दिल्ली


Comments

Popular posts from this blog

अनूप भाई ऐसी भी क्या नाराजगी

प्रशांत किशोर