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हारिए न हिम्मत बिसारिये न राम।

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ऐसा कौन व्यक्ति होगा जिसने जीवन में मुसीबत न झेली हो जिसके जीवन काल में उसके उपर विपत्ति न आई हो। विपत्ति के समय मन अधीर हो जाता है स्वाभाविक है जब अपनी मर्जी अपनी इच्छा के मुताबिक घटनाएं घटित नहीं होती हैं तो अधीर होना स्वाभाविक वृति है। मनुष्य अपने को निरीह और बेचारा समझ लेता है। यही वह वक्त होता है जब आदमी के धैर्य की परीक्षा होती है। उस मनुष्य के अंदर का आत्म बल परमात्मा में भरोसे की क्षमता और कठिनाइयों से निपटने के लिए आवश्यक बुद्दि का वास्तविक परीक्षण होता है। जो विपत्ति में धैर्य धारण कर विपत्ति का सामना करता है वह पहले की अपेक्षा और मजबूत होकर समाज में स्थापित होता है और जो टूट जाता है वह जीवन भऱ में नहीं संभल पाता है। इसलिए बड़ी से बड़ी कठिनाई में भी मनुष्य को दो कार्य अवश्य करना चाहिए। साहस और भगवान का आश्रय जिसने इन दोनों का सहारा नहीं छोड़ा वह प्रत्येक विपत्ति के बाद और मजबूत होता गया है। इसीलिए कहा जाता है हारिये न हिम्मत बिसारिये न राम...   विजय के मनोविज्ञान को प्रयोग करना सीखें। कुछ लोग सुझाते हैं कि हार की बात कभी नहीं करना चाहिए। सबसे पहले अपनी हार और उसके कारणों ...

प्रशांत किशोर

जीत का अचूक मंत्र देने वाले प्रशांत किशोर के इन दिनो वारे न्यारे हैं। आए दिन हर दल उनसे संपर्क करता है हर दिन उनसे मंत्रणा करते हैं और आने वाले चुनावों में जीत का जंतर जानने के जतन करते हैं। प्रशांत किशोर के इस जादू की शुरुआत वर्ष 2014 में हुई जब पता चला कि नरेंद्र मोदी की अगुआई में भाजपा की जीत में प्रशांत किशोर का खास योगदान है। उन्होंने दस साल की कांग्रेस नीत यूपीए सरकार की नाकामियों और नए भारत के सपने के साथ मोदी को मैदान में उतारा और जनता ने जोरदार रिस्पांस दिया। वही प्रशांत किशोर बाद में अलग अलग राज्यों के दलों के साथ मिलकर काम करते हुए जीत का जंतर देने लगे। हाल ही में पश्चिम बंगाल के चुनावों में प्रशांत किशोर की टीम ने तृणमूल कांग्रेस की जिस प्रकार से रणनीति गढी उससे भाजपा के दो सो सीटों के दावे की हवा निकल गई। प्रशांत किशोर और उनकी टीम जिस प्रकार से जमीन पर जाकर काम करती हेै लोगों के मनोभावों समस्याओं और विचारों को समझने का प्रयास करती है यह उसी का नतीजा है कि वे राजनीतिक दलों के लिए उचित परामर्श दे पाते हैं क्या करना चाहिए। यह भले ही अजीब लगे लेकिन सच है कि हमारे राजनीतिक दल अ...

वादी में क्या होगा बदलाव

 तो जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रावधान हटने के बाद यह पहली दफा है जब केंद्र सरकार जम्मू कश्मीर के राजनीतिक दलों के साथ चर्चा कर रही है। 24 जून 2021 की यह तारीख आज ऐतिहासिक है क्योकि अनुच्छेद 370 हटने के बाद जिस प्रकार से पूर्व मुख्यमंत्रियों को नजरबंद किया गया वह दौर वादी के लिए काफी मुश्किल भऱा रहा है। यह बात भी सच है कि इस दौर में राज्य में प्रगति की एक बयार देखने को मिली है।  5 अगस्त 2019 को केंद्र ने जम्मू-कश्मीर के स्पेशल स्टेट्स को खत्म कर राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांट दिया था। उसके बाद से राजनीतिक हालात अस्थिर हो गए थे। ज्यादातर बड़े नेता नजरबंद रहे। कुछ को पब्लिक सेफ्टी एक्ट (PSA) के तहत जम्मू और कश्मीर के बाहर जेलों में भेज दिया गया।  अनुच्छेद 370 को हटाए जाने से ठीक 2 दिन पहले केंद्र सरकार ने बाहरी लोगों को कश्मीर छोड़ने का निर्देश जारी किया। इसके बाद हजारों पर्यटक, प्रवासी श्रमिक और छात्र कश्मीर छोड़कर चले गए। बंदिशों के कारण करीब 5.20 लाख पर्यटकों का आना-जाना प्रभावित हुआ। सैकड़ों कारीगर, कैब ड्राइवर, खुदरा विक्रेता और ...

खुद को बेहतर बनाइए जीवन को सुंदर बनाइए जग सुंदर बनेगा

आज जीवन को लेकर एक बेहतरीन सोच और दर्शन पढने को मिला। दैनिक भास्कर में विख्यात अमेरिकी लेखक रिक रिगस्बी लिखते हैं कि जीवन में आपको हर दिन यह सोचना और विचार करना चाहिए कि आप खुद कैसा जीवन व्यतीत कर रहे हैं। दरअसल आप को हमेशा खुद को बेहतर करने निखारने की नितांत जरुरत है। अगर समाज को परिवार को देश को सुधारना चाहते हैं तो पहले खुद को बेहतर बनाना जरुरी है। आप खुद के जैसा बनिये। आपके पास इसके अलावा और कोई चारा भी नहीं है। कहा भी जाता है जो खुद को बेहतर नहीं कर सकता है वह अन्य लोगों को कैसेे बेहतर कर सकेगा परिवर्तन सुधार की गुंजाइश खुद में सबसे पहले तलाशने की जरुरत है। जो व्यक्ति अपने बारे में नहीं सोच सकता है वह दरअसल कुछ सोच ही नहीं सकता है। अच्छा काम तब तक अच्छा नहीं है जब तक कि उसमें कुछ बेहतर करने की गुंजाइश रहती है लिहाजा आप को हमेशा अपने काम का मूल्यांकन करने की जरुरत रहनी चाहिए। निष्पक्ष मूल्यांकन आत्मावलोकन और विचारों की मीमांसा ही आपको तराशने में मददगार होगी। यही चिंतन का पहला नियम है। माइकल एंजेलो ने कहा है कि मुझे इससे कोई दिक्कत नहीं है कि अगर कोई बड़े लक्ष्य तय करने उन्हें हासिल...

घर का रिनोवेशन

 घर को नए सिरे से बनाने की जद्दोजहद जारी है। पैसा इफरात दे दिया है जितना दिया जाना है अब तक उससे कहीं ज्यादा दिया है। लेकिन मुई जबान और लोगों के ईमान का कोई भरोसा नहीं लिहाजा कहीं ज्यादा निकल गया है। अपनी गाढी कमाई और पाई पाई का हिसाब रखने के बाद भी पैसा बचता नहीं है। खैर.... खबर यह है कि घर का रिनोवेशेन का काम जारी है। पुराने सब बदल डालूंगा की तर्ज पर सोचा था एक शानदार मकान बनेगा मार्बल की ठंडी जमीन के स्थान पर टाइल्स बिछेंगे ... बिछे भी... माडुलर किचन होगा ... हो भी रहा है। घर की खिड़कियां पुराने जमाने की हैं जिसमें लकड़ी के पल्ले लगे हुए हैं इनके स्थान पर अब साफ हवादार एल्युमिनियम के पल्ले लगेंगे जो एक सटाक में खुल और बंद हो जाएंगे फिलहाल पता नहीं लेकिन उम्मीद से हैं कि शायद बदलेंगे।  तो घर तो बन ही रहा है रिनोवेट भी हो रहा है नए काम चल रहे हैं लेकिन क्या वाकई "घर" बन रहा है महज एक साल पहले तक घर गुलजार था किचकिच से अशांति से आपसी वैमनस्यता और सिर फुटव्वल के बीच मजबूरी ही सही एक साझी एकरसता से। सब्जियां आती थीं तो बनती थीं। घर में आटा आता था तो रोटियां बनती थीं। किचन में क...
जिस कांग्रेस का इतिहास ही सत्ता को अपने मन मुताबिक रखने और राज्यपाल को अपने तुरुप के इक्के की तरह उपयोग करने का रहा है वह एक बार फिर कर्नाटक में स्यापा कर रही है। कर्नाटक विधानसभा में सबसे बड़े दल के रूप में उभरी बीजेपी के कुल 104 विधायक चुनकर आए हैं वहीं कांग्रेस के 78 और जेडीएस के 37 विधायक हैं। इसके अलावा दो विधायक निर्दलीय हैं। जाहिर तौर पर राजनीति की बिसात पर कांग्रेस की आज वही पोजीशन है जो कभी दूसरे राजनीतिक दलों की होती थी चाहे वह बीजेपी हो समाजवादी पार्टी हो जेडीयू हो या अन्य राजनीतिक दल। कांग्रेस ने कभी धनबल का इस्तेमाल कर तो कभी राज्यपाल के पद का दुरुपयोग कर राज्यों में विपक्षियों को नहीं रहने दिया है। राजनीति में सभी के दिन फिरते हैं आज कांग्रेस को उसी की भाषा में शाह और मोदी की जोड़ी टक्कर दे रही है और ऐसी टक्कर जिसके सामने कांग्रेस के दिग्गज नेता पानी मांग रहे हैं। राज्यपाल वजुभाई बाला ने येदियुरप्पा को सरकार बनाने का न्यौता देकर उसी परंपरा का पालन किया है जो अब तक राज्यपाल करते आए हैं। नैतिकता का तकाजा तो यही कहता है कि विधानसभा में सबसे बड़े राजनीतिक दल को सरकार बनाने क...