वादी में क्या होगा बदलाव

 तो जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रावधान हटने के बाद यह पहली दफा है जब केंद्र सरकार जम्मू कश्मीर के राजनीतिक दलों के साथ चर्चा कर रही है। 24 जून 2021 की यह तारीख आज ऐतिहासिक है क्योकि अनुच्छेद 370 हटने के बाद जिस प्रकार से पूर्व मुख्यमंत्रियों को नजरबंद किया गया वह दौर वादी के लिए काफी मुश्किल भऱा रहा है। यह बात भी सच है कि इस दौर में राज्य में प्रगति की एक बयार देखने को मिली है। 

5 अगस्त 2019 को केंद्र ने जम्मू-कश्मीर के स्पेशल स्टेट्स को खत्म कर राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांट दिया था। उसके बाद से राजनीतिक हालात अस्थिर हो गए थे। ज्यादातर बड़े नेता नजरबंद रहे। कुछ को पब्लिक सेफ्टी एक्ट (PSA) के तहत जम्मू और कश्मीर के बाहर जेलों में भेज दिया गया। 

अनुच्छेद 370 को हटाए जाने से ठीक 2 दिन पहले केंद्र सरकार ने बाहरी लोगों को कश्मीर छोड़ने का निर्देश जारी किया। इसके बाद हजारों पर्यटक, प्रवासी श्रमिक और छात्र कश्मीर छोड़कर चले गए। बंदिशों के कारण करीब 5.20 लाख पर्यटकों का आना-जाना प्रभावित हुआ। सैकड़ों कारीगर, कैब ड्राइवर, खुदरा विक्रेता और निजी क्षेत्र के कर्मचारी बेरोजगार हो गए। दिसंबर 2019 में कश्मीर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (KCCI) ने अपनी एक इकोनॉमिकल रिपोर्ट में बताया कि, कश्मीर की अर्थव्यवस्था को 17,800 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। 2019 में अगस्त और अक्टूबर के बीच 4.9 लाख नौकरियां चली गईं। यह राज्य के लिए बहुत बड़ा झटका था। केंद्र शासित सरकार ने राज्य के इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर फोकस किया है। इसके तहत वित्त वर्ष 2021-22 में 4545.06 करोड़ रुपए की 1235 परियोजनाओं को पूरा करने का लक्ष्य रखा है। इसके अलावा 7110.78 करोड़ रुपए की कुल 2357 स्वीकृत परियोजनाओं में से 1555.16 करोड़ रुपए की 1100 परियोजनाएं भी पूरी कर चुकी है। कश्मीरी कला और शिल्प को जीवित करने के प्रयास शुरू देश के ऊनी शॉल के कुल निर्यात में जम्मू-कश्मीर का योगदान 80% है। केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में स्वीकृत नई औद्योगिक विकास योजना में हस्तशिल्प और हथकरघा क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया गया है। स्थानीय बुनकरों और कारीगरों को उनकी आजीविका सृजन के साथ-साथ पुराने शिल्प को बढ़ावा देने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार कश्मीरी कालीन, लकड़ी की नक्काशी, नमदा शिल्प, फूल कारी, बसोहली पेंटिंग, ट्वीड फैब्रिक, चिकरी शिल्प आदि की जीआई टैगिंग पर काम कर रही है ताकि इन उत्पादों को अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में उपलब्ध कराया जा सके। जम्मू-कश्मीर के हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों को अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसे वैश्विक मंच प्रदान किए गए हैं। युवाओं की शिक्षा और रोजगार बढ़ाने के लिए सरकार जम्मू-कश्मीर के युवाओं तक पहुंचने के लिए भी कदम उठा रही है। जम्मू-कश्मीर की प्रत्येक पंचायत में युवा पीढ़ी की सभी चिंताओं को दूर करने के लिए एक यूथ क्लब होगा। पहले चरण में 4290 पंचायतों के 22,500 युवाओं को लगाया जाएगा। सरकार इस पहल पर 12 करोड़ रुपए खर्च करेगी। सिविल सेवा, अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए कोचिंग प्रदान करने के लिए जम्मू और श्रीनगर में दो अत्याधुनिक कोचिंग सेंटर जल्द ही शुरू होंगे। सरकार विशेष रूप से तैयार स्वरोजगार योजना के माध्यम से डेंटल सर्जन, पैरामेडिक्स को वित्तीय सहायता भी प्रदान करेगी। बैक टू विलेज प्रोग्राम के तहत 50 हजार युवाओं पर फोकस उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने बताया कि राज्य की महत्वाकांक्षी बैक टू विलेज प्रोग्राम के अगले फेज में सरकार 50 हजार युवाओं पर फोकस कर रही है। इस कार्यक्रम के तहत ऐसे युवाओं को रोजगार के लिए वित्तिय सहायता दी जाएगी। इसका प्लान जल्द ही सबके सामने होगा। इसके साथ ही हमने 25 हजार नौकरियों का वादा किया था। अब तक विभिन्न विभागों में भर्ती के लिए 18,000 पदों के विज्ञापन जारी किए गए हैं। अधिक पदों की पहचान की जा रही है। सिन्हा ने बताया कि हम जम्मू-कश्मीर के लोगों खासकर युवाओं को सशक्त बनाना चाहते हैं। यहां पहली बार जमीनी स्तर पर लोकतंत्र फल-फूल रहा है। निर्णय लेने की प्रक्रिया में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि युवाओं को अधिक से अधिक अवसर मिले। 3500 मेगावाट की परियोजनाओं पर काम शुरू उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने बताया कि आर्थिक संकट के बावजूद भी राज्य में बिजली व्यवस्था सुधारने के लिए हर साल 3,500 करोड़ रुपए का बजट रखा गया है। प्रदेश में ट्रांसमिशन, डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क और प्रोडक्शन कैपसिटी को मजबूत करने के लिए 24 घंटे काम हो रहा है। इसका परिणाम सर्दियों के दौरान दिखाई दिया, जब पहली बार कश्मीर घाटी में लोगों को बर्फ के दौरान भी निर्बाध बिजली आपूर्ति हुई थी। अगले 4 साल के भीतर राज्य में 3500 मेगावाट की परियोजनाएं जमीन पर होंगी। जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एक बड़ी चिंता 5 अगस्त 2019 को जम्मू और कश्मीर से स्पेशल स्टेटस वापस लेने के बाद यहां की आतंरिक सुरक्षा पर गहरा प्रभाव पड़ा है। इसके तहत संघर्ष विराम उल्लंघन और घुसपैठ की कोशिशों में कमी आई है। कई आतंकवादी और उनके कमांडरों का सफाया हुआ है। हालांकि, सुरक्षा बलों और राजनीतिक दलों के नेताओं पर हमला चिंता का विषय है। 

Comments

Popular posts from this blog

अनूप भाई ऐसी भी क्या नाराजगी

प्रशांत किशोर

आत्मपीड़ा ... पत्रकारिता के सर्वोच्च धर्म "परपीड़ा" को महसूस करने की आदत से भी कहीं ज्यादा