प्रशांत किशोर

जीत का अचूक मंत्र देने वाले प्रशांत किशोर के इन दिनो वारे न्यारे हैं। आए दिन हर दल उनसे संपर्क करता है हर दिन उनसे मंत्रणा करते हैं और आने वाले चुनावों में जीत का जंतर जानने के जतन करते हैं। प्रशांत किशोर के इस जादू की शुरुआत वर्ष 2014 में हुई जब पता चला कि नरेंद्र मोदी की अगुआई में भाजपा की जीत में प्रशांत किशोर का खास योगदान है। उन्होंने दस साल की कांग्रेस नीत यूपीए सरकार की नाकामियों और नए भारत के सपने के साथ मोदी को मैदान में उतारा और जनता ने जोरदार रिस्पांस दिया। वही प्रशांत किशोर बाद में अलग अलग राज्यों के दलों के साथ मिलकर काम करते हुए जीत का जंतर देने लगे। हाल ही में पश्चिम बंगाल के चुनावों में प्रशांत किशोर की टीम ने तृणमूल कांग्रेस की जिस प्रकार से रणनीति गढी उससे भाजपा के दो सो सीटों के दावे की हवा निकल गई। प्रशांत किशोर और उनकी टीम जिस प्रकार से जमीन पर जाकर काम करती हेै लोगों के मनोभावों समस्याओं और विचारों को समझने का प्रयास करती है यह उसी का नतीजा है कि वे राजनीतिक दलों के लिए उचित परामर्श दे पाते हैं क्या करना चाहिए। यह भले ही अजीब लगे लेकिन सच है कि हमारे राजनीतिक दल अपने ही लोगों अपने ही मतदाताओं जिनकी बदौलत वे इस मुकाम परपहुंचते हैं उनकी मूल समस्याओं और विचारों को नहीं समझ पाते हैं। जनता के मनोभावों को समझने वाले नेताओं को नितांत अभाव हो गया है यही कारण है कि आज के दौर में इस प्रकार के रणनीतिकार सोशल मीडिया स्ट्रेटजिस्ट लगातार काम करते हुए इन दलों को जीत का मंत्र बता रहे है।  

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