सवाल टाइमिंग का है बॉस

क्रिकेट में बल्लेबाज की टाइमिंग का बहुत महत्व होता है सचिन तेंदुलकर राहुल द्रविण या वीवीएस लक्ष्मण इसलिए सफल हुए क्योंकि गेंदबाजों की गेंदों का सामना करते हुए अपने बल्ले की टाइमिंग का खास खयाल रखते थे कब स्पिनर्स को मारना है तो कब तेज गेंदबाजों की गेंदों को सावधानी से खेलना है तो किसी बाउंसर होती गेंद को फाइन लेग पर उठाकर मारना है .. यह उनकी बेहतर टाइमिंग और कलात्मक बल्लेबाजी ही थी जो आज भी वे बेहतरीन बल्लेबाजी के लिए नजीर माने जाते हैं . फिल्मों में भी डॉयलॉग की टाइमिंग का अपना खास महत्व और मतलब माना जाता है। अभिताम बच्चन को बेहतरीन अभिनेता इसीलिए माना जाता है क्योंकि वे अपनी अभिव्यक्ति में काफी सक्षम थे उनके डॉयलॉग मौजू रहते हैं वे समय और परिस्थिति के मुताबिक डॉयलॉग बोलते हैं। वहीं फिल्म अभिनेता राजकुमार अपने डॉयलॉग और उनकी अंदाज के कारण ही चर्चित हैं। बात टाइमिंग की हो तो चाहे वह खेल हो या फिल्म हो या फिर राजनीति सभी जगह टाइमिंग का खेल है। सूचना संसाधनों के बेहतरीन उपयोग में माहिर केंद्र की मोदी सरकार और राज्य की शिवराज सरकार भी अपनी राजनीति को चमकाने में टाइमिंग का बेहतरीन उपयोग करते हैं। चाहे वह व्यापम को लेकर उछला मामला हो या फिर किसानों की जमीन और उनके फसलों को हुए नुकसान को लेकर विपक्ष के आरोपों का.. केंद्र और राज्य सरकार विपक्ष की धार भोथरी करने में टाइमिंग का खास ख्याल रखते हैं। याद होगा जब जब कांग्रेसनीत विपक्ष ने मध्यप्रदेश में सत्तारूढ़ शिवराज सरकार ने हमला बोला है तब तब शिवराज सरकार ने बड़ी कुशलता से विपक्ष के आरोपों का जवाब बेहतरीन टाइमिंग से दिया है। व्यापमं घोटाले मे फंसी सरकार को संकट से निजात दिलाने में शिवराज की टाइमिंग की खास भूमिका है। चतुर राजनीतिज्ञ मुख्यमंत्री ने राजनीति के चाणक्य माने जाने वाले कांग्रेस के दिग्गज नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के एक के बाद दूसरे आरोपों को अपनी बेहतरीन टाइमिंग से नेस्तनाबूत सा कर दिया है। दिग्विजय सिहं अपनी एक्सल सीट और तमाम आरोपों के सबूत लाने के बाद भी एसआईटी को जांच के लिए भरोसे में नहीं ला सके। वहीं राज्य सरकार ने कांग्रेस शासनकाल में विधानसभा में हुई नियुक्तियों की जांच कर सीधे दिग्विजय की मुश्किलें ही बढ़ा दी क्रिकेट की भाषा में कहें तो तेज गेंदबाज की गेंद को आगे आकर सीधे स्टेट ड्राइव पर छक्के के लिए उछाल दिया। राजनीति में कब क्या बोलना है और क्या करना है इसकी बेहतर जानकारी ही एक राजनीतिज्ञ को आम से चतुर राजनीतिज्ञ की श्रेणी में परिवर्तित करती है और राज्य की भाजपानीत सरकार राजनीति की टाइमिंग को बखूबी समझने लगी है .जहां पर उमा भारती जैसा हिट विकेट होना नहीं बल्कि गेंदबाज पर हावी होकर खेलना ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है और फिर जब सरकार भी अपनी हो तो राजनीति के अंपायरों से अपने मन के मुताबिक फैसले लेना भी सरल हो।
कुछ ऐसी ही बेहतरीन टाइमिंग केंद्र सरकार की दिख रही है. 44 सीटों पर सिमट चुकी कांग्रेस अपने अस्तित्व के लिए छटपटा रही है। पांच रुपए और बारह रुपए में भोजन उपलब्ध कराने जैसे बयानों का दंश भोग रही कांग्रेस अब किसान मजदूर और आम आदमी की बात कर रही है। भारी भरकम बहुमत से सत्ता में आई मोदी सरकार को लपेटने के लिए कांग्रेस अपने आक्रमण तेज कर रही है लेकिन नरेंद्र मोदी जो अपनी बेहतरीन वक्तृत्व क्षमता और कुशल राजनीतिक चातुर्य के लिए जाने जाते हैं वे अपनी बातों और राजनीति में टाइमिंग का खास ख्याल रखते हैं। 19 अप्रैल को कांग्रेस ने संगठन में जान फूंकने और किसानों मजदूरों से सरोकार दिखाने के लिए दिल्ली में अपनी रैली की देश भर से नेता एकट्ठे किए लेकिन संयोग देखिए उसी दिन पीएम मोदी ने अपने सांसदों की क्लास ले ली। इसे कहते हैं सामने वाले गेंदबाज पर हावी होकर खेलना। राजनीति की पिच पर मोदी उस बल्लेबाज की तरह खेल रहे हैं जिसे पता है कि अगर सामने वाले गेंदबाज की चार गेंदों को बाउंड्री से पार भेज दिया तो यह अपना अगला स्पेल काफी समय़ बाद लेगा लिहाजा वे राजनीति की पिच पर जोरदार अंदाज में और करारे शॉट खेल रहे हैं। हां इसमें उनकी कलात्मक निपुणता काफी अहम है वे इसमें काफी माहिर भी हैं। विपक्ष के आरोपों को कुंद करना उन्हें बहुत अच्छे से आता है कब बोलना क्या बोलना है कितना बोलना है पीएम मोदी से बेहतर शायद ही मौजूदा दौर का कोई राजनीतिज्ञ समझता हो मीडिया में कैसे सुर्खियां हासिल करना है और किस तरह से विपक्ष के आरोपों को अपने अंदाज में हवा कर देना है यह मोदी से बेहतर कोई नहीं जानता सितंबर 2013 में जब वे बीजेपी के पीएम पद के उम्मीद्वार घोषित हुए उसके बाद से ही वे राजनीति की पिच पर अपने मंजे हुए खिलाड़ी होने के लगातार सबूत देते आए हैं. मजबूत व्यक्तित्व और राजनीति के मंजे हुए खिलाड़ी होने का सबूत देने वाले मोदी एक तरफ जहां विश्व राजनीति पर धूमकेतु की तरह छा रहे हैं वहीं भारतीय राजनीति में साठ से ज्यादा सालों तक सत्तासीन रही कांग्रेस इस समय अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही है तो यह केवल टाइमिंग का ही खेल है। मोदी नीत भाजपा सरकार ने अपने विरोधियों के दमखम का ठीक ठाक अंदाजा लगा लिया है और वे जानते हैं कि एक गेंद भी खराब खेली तो उनका आउट होना तय है लिहाजा वे हर गेंद को राहुल द्रविण की तर्ज पर ठोक बजाकर खेल रहे हैं। 11 महीने सरकार में बिता लेने के बाद भी खुद को पाक साफ बचा ले जाना मोदी नीत बीजेपी सरकार के लिए किसी उपलब्धि से कम नहीं है वहीं विपक्ष अभी प्रेक्टिस करता हुआ दिखाई दे रहा है। पांच साल के इस टेस्ट मैच का परिणाम जो हो लेकिन इतना तो तय है कि फिलहाल सरकार की टाइमिंग से विपक्ष की आरोपों रूपी गेंदबाजी की धार कुंद दिख रही है।






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