शक्ति की उपासना का नवरात्र ...मैं यह व्रत हर वर्ष रखता हूं हर वर्ष देवी की आराधना करता हूं। दोनों समय व्रत और खुद को साफ स्वच्छ रखने की पूरी कोशिश होती है। मां के दर्शन पवित्र धर्मग्रंथों का परायण इसके साथ ही साथ कोशिश करना कि हर वर्ष मां के दर्शन कर सकूं । क्या नवरात्र दोनों समय व्रत रखने और धर्मग्रंथों के परायण के दिन हैं क्या हमें यह सीख नहीं लेनी चाहिए कि आज के दौर में नवरात्रि का क्या महत्व है। क्या हमें नवरात्र का महत्व इस तरह नहीं सीखना चाहिए कि नवरात्रि दरअसल हमारे सकल ब्रह्मांड में स्त्री शक्ति के महत्व और उसके महत्व की ओर इंगित करता है। हममे से कितने लोग हैं जिन्होंने नारी की शक्ति के महत्व को पहचाना है औऱ उसके गौरव को वापिस दिलाने की ओर प्रयास किए हैं। दरअसल हम चमत्कार को ही पहचान सके हैं। शक्ति का वह स्वरूप जो हमारे घरों में निवास करता है वह स्वरूप जो हमारे साथ खेलता हंसता बोलता है हमें प्यार करता है हमें बुरी आदतों से परहेज करने से लेकर हमारे दुख सुख में साथ होता है शक्ति के उस स्वरूप की तरफ हम बिलकुल ध्यान नहीं देते हैं। दरअसल नवरात्र हमें हमारे उसी कर्तव्य और दायित्व की ओऱ ध्यान दिलाने का एक माध्यम है। कम से कम आज के दौर में जबकि देश के कुछ दकिनानूसी और पारंपरिक लोग अपनी बेटियों की कोख में ही हत्या कर देते हैं ऐसे दौर में नवरात्रि के पारंपरिक मायनों और परिभाषाओं के बजाय शक्ति के इस पवित्र पर्व को नारी शक्ति के महात्म्य से जोड़ना मौजूं होगा।
अनूप भाई ऐसी भी क्या नाराजगी
30 मार्च 2015 रात के करीब दस बज रहे थे ...मैं यूं ही बैठा हुआ नेट पर कुछ खंगाल रहा था कि अनायास हमारे छोटे भाई सदृश और वरिष्ठ पत्रकार डॉ प्रवीण तिवारी का फोन आया। प्रवीण का फोन आता है तो हम लंबे समय तक देशदुनिया की बात करते हैं और एक दूसरे पर जमकर चिल्लाते हैं लेकिन आज उसकी उदासी और सांसों में बैचेनी को सहज ही समझा जा सकता था। फोन उठाते ही कहा कि एक बुरी खबर है.. मैं चौंक गया मन उधेड़बुन में लग गया .. कयासों के बादल दिमाग में मंडराने लगे सोचा शायद इसने लाइव इंडिया को बॉय बॉय बोल दिया या फिर शायद कुछ और.. इतना समय भी नहीं था, क्योंकि प्रवीण सरीखा हंसमुख व्यक्ति कभी उदास अच्छा नहीं लगता मैने पूछा तो बताया कि भाई अनूप झा नहीं रहे। बताया कि करनाल में सड़क दुर्घटना में अनूप को गहरी चोट आई थी दिल्ली के एम्स अस्पताल में भर्ती कराया दिनभर इलाज चला लेकिन अत्यधिक रक्तस्राव से अनूप की जान नहीं बचाई जा सकी। हम दोनों के लिए अनूप झा का इस तरह से चले जाना किसी व्यक्तिगत क्षति से कम नहीं है। यह उन दिनों की बात है जबकि हम लाइव इंडिया के अखबार प्रजातंत्रलाइव के लिए बहुत शुरुआती दौर में तैया...
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