शिक्षा में घोटाला पर नकेल की अधूरी कोशिश

व्यापमं घोटाला मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई ने आज अपनी चार्जशीट पेश कर दी है। इस चार्जशीट में सीबीआई ने 2012 की पीएमटी परीक्षा में कथित तौर पर हुए फर्जीवाड़े में कुल 592 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया है। इनमें व्यापमं यानी वह संस्था जो यह परीक्षा कराती रही है उसके तत्कालीन निदेशक पंकज त्रिवेदी उनके चार सहयोगी अधिकारी डॉक्टरों की फैक्ट्री के चार सरगना यानी निजी कॉलेजों के मालिक छात्र कर्मचारी दलाल सभी शामिल हैं। यह पूरा मामला 2012 के पीएमटी परीक्षा घोटाले से जुड़ा हुआ है।व्यावसायिक परीक्षा मंडल ने मध्यप्रदेश को अनेकों होनहार इंजीनियर, कुशल और विशेषज्ञ चिकित्सक कृषि अधिकारी सहित अन्य प्रोफेशनल सेवाओं के लिए कुशल होनहार छात्रों का चयन किया लेकिन शिक्षा में निजीकरण की बढती प्रवृति और निजी कॉलेजों में एडमिशन को लेकर छात्रों की सहज उत्कंठा ने इस संस्थान के दामन को ऐसे कीचड़ में लपेटा कि चिनार पार्क के बगल में खड़ी यह इमारत आज मध्यप्रदेश के लिए शर्मिंदगी का एक अहसास बन गई है। 


ठीक बगल में सरकार ने शौर्य स्मारक बनाकर अपने राष्ट्रवादी चरित्र को सामने रखने की कोशिश की लेकिन व्यापम कर्मचारियों अधिकारियों की काली करतूतें शौर्य स्मारक के रूप में सरकार के राष्ट्रवादी चरित्र को कहीं न कहीं कलंकित करती है। व्यापम घोटाला कोई एक साल का घोटाला नहीं है साल दर साल होनहार छात्रों की कीमत पर नाकाबिल लोगों ने बाजी मारी और जो प्रतिभाएं सफल नहीं हुईं वो या तो दम घोंट कर वैकल्पिक करियरों की तरफ मुड़ गईं या फिर उन्होंने जीवन को खत्म करना बेहतर समझा हालांकि सरकार की नजर में व्यापमं घोटाले के फलस्वरूप एक भी मौत नहीं हुई है। 

बहरहाल सीबीआई ने इस पूरे मामले को लेकर भोपाल जिला अदालत में अपनी जो लंबी चौड़ी चार्जशीट दायर की है उम्मीद की जानी चाहिए कि भारत की आशा की केंद्र यह जांच एजेंसी इन आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सबूत पेश कर उन्हें केवल इस बात के लिए दंड नहीं कराएगी कि इन्होंने एक ईमानदार परीक्षा व्यवस्था को दागदार बनाया बल्कि इन दलालों शिक्षा माफियाओं और अधिकारियों के नेक्सस को खंगाल कर शिक्षा व्यवस्था में फैले कुहासे को खत्म करने में सरकार की मदद करेगी। 

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