एक राजा की नर्मदा यात्रा

तो दिग्विजय सिंह राघोगढ के महाराजा मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अपनी नर्मदा यात्रा के साठ दिन पूरे कर रहे हैं... नरसिंहपुर के बरमान घाट से शुरु हुई दिग्विजयी यात्रा महाराष्ट्र और गुजरात के कुछ जिलों से गुजरती हुई वापस आने को है। इस दौरान दिग्विजय सिंह के साथ उनकी पत्नी अमृता राय गाडरवारा से वरिष्ठ कांग्रेस नेता रामेश्वर नीखरा सहित नर्मदा प्रेमी श्रद्दालुओं का कारवां चल रहा है। अगर इस पूरी यात्रा पर गौर किया जाए तो निश्चित ही दिग्विजय सिंह की यह यात्रा केवल धार्मिक उद्देश्यों के लिए याद की जाएगी। क्योंकि जब तक वो मीडिया की राडार में रहे तब तक  छुटभैये नेता विधायक की टिकट जुगत भिड़ाने उनके साथ सेल्फी खिंचाने वाले लोग राजा के सामने आते रहे लेकिन अब जबकि दिग्विजय सिंह मध्यप्रदेश की धरती से दूर गुजरात और महाराष्ट्र में नर्मदा किनारे विचरण कर रहे हैं तब उनके साथ श्रद्दालुओं का वो कारवां है जो केवल नर्मदा की गोद में बैठकर इसकी शीतलता का अनुभव करना चाहता है। 

इस पूरी यात्रा के दौरान दिग्विजय सिंह ने जहां अपने राजनीतिक सरोकारों से खुद को दूर रखा वहीं उन्होंने प्रदेश कांग्रेस के नेताओं को भी भाव नहीं दिया। कह सकते हैं पिछले सात दशक के जीवन में उन्होंने जो सोचा था शायद वह आज नर्मदा यात्रा के जरिए अपने इस स्वप्न को पूरा कर रहे हैं। यह भी कम दिलचस्प नहीं कि दिग्विजय सिंह की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जबकि उनकी पहली धर्मपत्नी का स्वर्गवास हो गया है और उनकी वर्तमान पत्नी अमृता राय यात्रा को लेकर न केवल उनके साथ हमकदम हैं बल्कि वो इस यात्रा का पूरा आनंद उठा रही हैं। 



जीवन की यह खूबसूरती है आप अगर जीवन में सब कुछ हासिल होने के बाद भी निराश हों आनंद न प्राप्त कर सकें तो सब कुछ प्रकृति पर छोड़ देना चाहिए शायद प्रकृति हमें यह सबक बार बार याद दिलाती हैं लेकिन हम हैं कि मानते ही नहीं ... ज्यादा सोचना ज्यादा काम करना लगातार काम करना हर वक्त राजनीति से बचकर फुर्सत और आध्यात्मिकता से भऱे यह पल राघोगढ के राजा को अपनी राजनीतिक यात्रा में नई उर्जा और नया भरोसा देंगे। 

शायद वह आने वाले समय में मध्यप्रदेश की राजनीति और देश की राजनीति में एक नए उत्साह और आत्मविश्वास से लबरेज होकर उतर सकेंगे। शायद मुख्य विपक्षी दल को इस तरह के उत्साह की जरूरत भी है। 

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